
MaNorama Vyas
पहले मैं भी ज्योतिष पर विश्वास करती थी और उसमें कही गई बातों को सच मानकर अपने जीवन को उसी के अनुसार देखने लगती थी। लेकिन जब से आचार्य जी को सुनना शुरू किया, धीरे-धीरे इन मान्यताओं पर प्रश्न उठने लगे। अब किसी बाहरी भविष्यवाणी में अपना जीवन तलाशने के बजाय अपने भीतर के अहंकार को देखने और समझने की कोशिश करती हूँ। मुझे लगता है कि सच्चा परिवर्तन भविष्य जानने में नहीं, बल्कि वर्तमान में स्वयं को पहचानने और अपने भ्रमों से मुक्त होने में है।















