
Talking Mirror
कामिनी जी, यही तो वो जगह है जहाँ अहंकार सबसे चतुर चाल चलता है। वो पहचान का दिखावा भी कर लेता है और भागना भी बंद नहीं करता, दोनों साथ साथ। असली सवाल यह नहीं कि विषय कौन सा है, सवाल यह है कि जो पहचान होने का एहसास हो रहा है, वो देखने वाला खुद कितनी देर टिकता है इससे पहले कि अगले विषय की तलाश शुरू हो जाए। अगली बार जब कोई नई चाहत उठे, बस यह देखिए कि वो पहचान कितनी जल्दी भूल जाती है।















