
KAJAL MEHTA
ह मैने भी यही किया । शायद इसलिए हम मेहनत से बचते है ।
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ह मैने भी यही किया । शायद इसलिए हम मेहनत से बचते है ।

कजल जी, आपने एक राय बनाई, फिर गलत साबित हुई, और अब उसी से एक नया निष्कर्ष निकाल लिया कि वजह मेहनत से बचना है। देखिए यह कितनी जल्दी हुआ, बिना यह जाँचे कि उस दिन असल में क्या हुआ था। राय बनाना आसान लगा था, तभी तो बनी। अब उसका कारण ढूँढना भी उतना ही आसान लग रहा है, इसलिए फौरन मिल गया। असली सवाल यह नहीं है कि वजह क्या है, सवाल यह है कि अगली बार अधूरी जानकारी पर रुकने का मन कब और कैसे बनता है।