
Vimla Patel
देखना यही है कि मैं जिस प्रेम, सम्मान या परंपरा को पकड़े हुए हूँ, उसमें वास्तव में दूसरे को देखने की कितनी जगह है और अपनी पहचान बचाने की कितनी। सच कहा जाए तो आज से पहले ऐसा कभी सोचा ही नहीं हम कभी दूसरों को इस नजर से देख ही नहीं पाते हम बस अपने "मै" के इर्द गिर्द ही घूमते रहते हैं।















