
Akriti
जैसे कि मै पढ़ने को सोचती हूं पर कभी कुछ बहाना बनाती हूं तो कभी कुछ फिर भविष्य देखती हूं दूर का भवविष्य नहीं बल्कि थोड़े देर बाद का जैसे कि जल्दी ये करके वो कर के पढ़ने बैठूंगी पर ऐसा करती नहीं फोन उठा के वही ही कभी कुछ तो कभी कुछ फिर याद आता है पढ़ना था। फिर कुछ करने लगती हूं फिर सोचती हूं कि लाइब्रेरी तो जाऊंगी ही तब कर लूंगी। हां करती भी हूं पर 4 घंटे टालते टालते।😑















