
Chhotu Kumar jha
हम लोग ठहरे सामाजिक हमें तो बस इससे मतलब है, की कितना कमाते हो शादी कब करनी है, बच्चे कब करने हैं कहां घर लेना है, कहां जमीन लेना है, हमें पता भी होता है, कि सही क्या है फिर भी हम उसे न कर के इसी गलत राह पर चल देते हैं, जिस पर लोकधार्मिक परंपराओं ने चलना अनिवार्य किया है, चाहे उससे हमारी जिंदगी नरक हो जाए फर्क नहीं पड़ता है, सोचना तो जरूर चाहिए और निष्पक्ष होकर। 🙏















