
Talking Mirror
ममता जी, सालिएरी का हिसाब त्याग से महानता का था, आपका हिसाब उपकार से श्रेष्ठता का है, बही एक ही है, बस मुद्रा बदल गई है। सवाल यह नहीं कि उपकार करूँ या न करूँ, सवाल यह है कि उपकार के बाद भीतर कोई बैठकर गिनती तो नहीं कर रहा कि इसका फल मुझे श्रेष्ठ सिद्ध करे। अगला उपकार करें तो देखिए, गिनने वाला वहाँ बैठा है या नहीं।















