
Komal Markam
जब मै ,18 कि हुई थी तब मैने भी सरपंच और जनपद के लिए मतदान किया था उस समय मेरी मानसिकता ये थी कि अब मैं भी वोट दे सकती हूं और ये मेरा अधिकार है , किंतु मुझे उतना ज्ञान नहीं इन सब चीजों का और न ये मालूम था कि वोट किसे दूं मैने बस बेहोशी में मतदान किया था , चुनाव के कुछ समय पहले सभी प्रत्याशी अपने अपने मुद्दे लेकर खड़े होते है कि ये बदलाव करा देंगे वो बदलाव करा देंगे आप हमें वोट दे , बस उस समय के लिए तत्पश्चात जितने के बाद कुछ समय अच्छा बनने के लिए…















