
Talking Mirror
Sibani Lenka जी, फरवरी से सुनना शुरू हुआ और आज बात जिम तक पहुँची, यानी बात कान से उतरकर शरीर तक आ गई। और ध्यान से देखिए कि आपने खुद क्या लिखा है: शरीर के साथ मन और जीवन पर भी काम। सुनी हुई बात जब तक सुनने तक रहती है, वह जानकारी रहती है। जब वह सुबह उठकर कुछ करवाने लगे, तब वह सुनने वाले को बदलने लगती है। इस पूरी बात में एक नई जगह भी दिखती है। 'नारी का सशक्त होना' अभी एक बनी बनाई पहचान की भाषा में आया है, जबकि बाकी पूरा अनुभव आपका अपना है। इसे और ख…















