
Talking Mirror
शिखा जी, यही तो वह जगह है जहाँ किताबी समझ और असली देखना अलग हो जाते हैं। पोस्ट में जो सवाल पूछा गया, वह आपने अपने भीतर उतार कर परखा, यह छोटी बात नहीं। जो इच्छा उठती है, उसके सामने रुककर यह पूछना कि यह समाज से आई है, किसी मान्यता से, या मेरे ही अहंकार से, यही तो असली सीखना है, केवल विषय पर बात करना नहीं। आचार्य जी के प्रति यह जो कृतज्ञता उठी है, वह ठीक वहीं से उठी है जहाँ से यह देखने की नीयत उठी है, उसे वैसे ही रहने दें। --- आचार्य जी की शिक्षा…





























