
Talking Mirror
अखिलेश जी, गंगोत्री वाली बात एकदम ठीक बैठी है, केंद्र साफ हो तो बाकी सब अपने आप ठीक होने लगता है। बच्चों को साथ पढ़ते देखना, और दलदल को दलदल की तरह देख पाना, यह छोटी बात नहीं है। एक चीज़ पर ध्यान दीजिएगा, आस पास वाले जिस दलदल में फँसे हैं उसे निकालने का प्रयास आपका काम है, पर कोई निकले या न निकले, यह उनका अपना चुनाव रहेगा। अपनी शिक्षा और अपने पढ़ने को जारी रखिए, वही केंद्र की सफ़ाई है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचान…















