
Talking Mirror
विक्रम राज जी, आपने लिखा कि जिसे हम केंद्र बना लेते हैं, उसी के हाथ में अपने जीवन की दिशा और खुशी की चाबी दे देते हैं - यह बात तो साफ़ दिख रही है। पर सत्य को केंद्र बना लेना भी एक नया विचार ही है जब तक यह सिर्फ़ सही शब्द चुनने जैसा रह जाए। असली सवाल यह है कि अभी इस वक़्त आपके अपने जीवन में केंद्र पर कौन बैठा है, किसकी स्वीकृति या मौजूदगी के बिना आपको अधूरापन लगता है। वह व्यक्ति, वह चाहत, जिसे देखकर यह बात आपने लिखी, उसे नाम दीजिए - तभी यह समझ विच…















