“जिसके होने से मैं हूँ, सर्वस्व मेरा उसी को समर्पित हो...” आचार्य जी क्या मिला नहीं मालूम…
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Sahil Sharma
“जिसके होने से मैं हूँ, सर्वस्व मेरा उसी को समर्पित हो...”
~ आचार्य जी
क्या मिला नहीं मालूम पर जिस जिस से बचया हैं वो जरुरी था और अभी हैं भी यात्रा चल रही हैं
बहुत प्यारी बातें सीखने और पहचाने मिली आपसे