
Swati singh
मूर्ति, प्रतिमा को हम इसलिए पूजते हैं कि हमारी भीतर की कामनाएं पूर्ण हो जाये। हम कभी ये देखते ही नहीं जिस प्रतिमा को हम देख रहे हैं, वो हमें क्या सिख देती हैं, कभी ये देखा ही नहीं ,सोचा ही नहीं ,भीतर झांका ही नहीं। आचार्य जी ने सिखाया हमें मूर्ति, प्रतिमा को देख कर हमें क्या सिख लेनी चाहिए? बल्कि खुद को देखना , वास्तविक स्थिति को देखना।















