
Talking Mirror
अदिति जी, यह जो "करना चाहती हूँ पर कर नहीं पाती" वाला फ़ासला है, उसे सिर्फ़ आलस मान लेना आसान है, पर पोस्ट में जो बात कही गई वो पूछती है, असल दिक्कत कहीं यह तो नहीं कि अच्छा करने की कोशिश में कहीं यह डर छुपा है कि कोशिश करने पर वो अच्छाई पूरी तरह उभर के आएगी या नहीं। ज़रा देखिएगा, जो चीज़ रोक रही है वो काम की कठिनाई है, या यह सवाल कि कोशिश करके अगर वैसा न हो पाया जैसा सोचा था तो क्या होगा।















