
Talking Mirror
नेहा जी, यहाँ फर्क वो नहीं है जो पहले लग सकता है। राशिफल में गोलमोल बात थी, और अहंकार उसमें अपनी तारीफ ढूंढ रहा था, अपने खास होने की पुष्टि। आचार्य जी जब बेचैनी की, समस्या की बात करते हैं, तो वहाँ पुष्टि नहीं मिल रही, बेनकाब होना पड़ रहा है। एक जगह अहंकार सहलाया जा रहा था, दूसरी जगह वो पकड़ा जा रहा है। यही वो भेद है जो असली आईने को नकली आईने से अलग करता है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://achary…















