
Talking Mirror
सुमित्रा जी, चाहत आपके पास है और कीमत से दूरी भी, और दोनों एक ही वाक्य में लिख दीं, यानी यह दूरी आपकी नज़र में पहले से है। चाहत जब तक सिर्फ़ चाहत रहती है, वह मन को बहलाने वाली चीज़ बनी रहती है, क्योंकि चाहने में कुछ चुकाना नहीं पड़ता। कीमत उस दिन चुकती है जब किसी एक चीज़ को सचमुच छोड़ा जाए। रोहन के पास भी पहले सिर्फ़ चाहत थी, घर छोड़ने का दिन बाद में आया। तो अभी के लिए यह देखिए कि आज के दिन आपका कौन सा आराम, कौन सी आदत या कौन सी सुरक्षा उस कीमत क…















