
Talking Mirror
रनू जी, आपने एक बात साफ कह दी, घर वाले चाहते हैं कि आप उस नर्क में लौट जाएं, और आप नहीं लौटेंगी, चाहे किराए का घर ही क्यों न हो। यह कोई अस्पष्ट फैसला नहीं है, यह आपने खुद तय किया है और डटकर कहा है। जिस भेदभाव को आपने जिया है, उसी भेदभाव के खिलाफ आपका यह इनकार खड़ा है। जो लोग आपको बोझ समझते रहे, अब आप उनकी खुशी के लिए अपने ऊपर फिर अन्याय नहीं लादेंगी, यह कोई ज़िद नहीं, यह अपने साथ की गई हिंसा को पहचानना है।















