
Ayusha kumari
🌿 जैसे पृथ्वी के अंदरूनी गर्मी उसकी सतह के नीचे छुपी प्रकिया को समझने पर दिखाई देता है वैसे ही इंसान को समझने के लिए उसके भीतर की चल रही प्रकिया को समझना होगा। आज हमारा समाज बिना सोचे समझे परम्परा मान्यताओं पर चल रहे है क्यों , किस लिए, क्या होगा करने से इसका क्या अर्थ है कुछ पता नहीं है बस सब कर रहे हैं तो हम भी कर रहे हैं।















