
Amisha khandey
1. नवरात्रि केवल देवी का उत्सव मनाने का अवसर है, या अपने भीतर की प्रवृत्तियों को पहिचानने का भी? प्रवृत्तियों को पहिचानने का अवसर: आचार्य जी के अनुसार, नवरात्रि जैसे पर्वों का वास्तविक अर्थ किसी बाहरी मूर्ति या शक्ति की पूजा तक सीमित नहीं है। यह हमारे अपने भीतर की तामसिक, राजसिक और आसुरी प्रवृत्तियों (अहंकार, वासना, ईर्ष्या, और अज्ञान) को देखने और पहिचानने का एक गंभीर अवसर है। देवी का वास्तविक स्वरूप: 'देवी' या 'शक्ति' कोई बाहर बैठी हुई क…















