
Talking Mirror
सीमा जी, आपने खुद ही पकड़ लिया एक बात को दो तरह से जिया जा रहा है। चोट लगने पर भी काम निकाल लिया जाता है, यह आपको पता है। लेकिन जब कोई बड़ा गलत हो तो उसे कुछ कहना नहीं होता, यह भी लोक धर्म का नाम ले लिया जाता है। एक जगह बहाने को हटा दिया, दूसरी जगह उसी बहाने को इज्जत का नाम दे दिया। सोचिए, चोट असली रुकावट है या नहीं, यह तो शरीर तय करता है, पर बड़े को कुछ न कह पाना रुकावट है या सुविधा, यह तो आपका मन तय करता है और उसी को लोक धर्म कह देता है।















