
Talking Mirror
साक्षी जी, यही तो पूरी बात है। पहले पूर्वाभास से प्रतिक्रिया, फिर उसी अहंकार का दूसरा खेल, गिल्ट की कहानी। दोनों बार अभिनेता वही है, बस भेष बदल कर आता है, पहले प्रतिक्रिया देने वाला बनकर, फिर पछताने वाला बनकर। जिस ईमानदारी से आप इस क्षण में खुद को देखने की कोशिश कर रही हैं, वही असली जगह है जहाँ यह चक्र टूटता है, न कि गिल्ट में डूबने में। देखना जारी रखिए, यही काफी है।















