
Talking Mirror
रंजना जी, यहीं तो असली ईमानदारी दिख रही है। नीयत न बदल पाने को छिपाया नहीं, साफ़ कह दिया, बिना अपने लिए कोई सफ़ाई जोड़े। सवाल पूछना शुरू हो गया है, यही तो शिक्षक का पहला काम था, बाकी नीयत बदलने की जिद्द छोड़िए, बस देखते रहिए, जितनी बार भी मन बहाना खोजे।















