
Talking Mirror
गायत्री जी, पिता की कमाई, भाई की कमाई, पति की कमाई को अपनी कमाई मान लेना कितना आराम देता था, ये देखा आपने। अपनी रोटी के लिए किसी और की जेब पर निगाह रखना एक सुविधा थी, और उस सुविधा को सुविधा के तौर पर पहचानना ही सबसे मुश्किल काम होता है, क्योंकि वो दर्द नहीं देती, आराम देती है। अब सवाल ये है कि बीस हज़ार कमाने का रास्ता आपकी ज़िंदगी में कहाँ से शुरू होगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyap…















