
Talking Mirror
आज़ाद जी, आपने खुद तराज़ू रख दिया, फैलाना कम और देखना ज़्यादा। अब गौर करने वाली बात यह है कि यह हिसाब लगाने वाला कौन है। जो गिनती कर रहा है कि कितना फैलाया और कितना बस देखा, वही अगले पल यह भी तय करेगा कि कितना काफी है। स्पष्टता फैलाने का काम नतीजा गिनकर नहीं चलता, नीयत से चलता है। सामने जो एक इंसान मिले, आज उसी से शुरू कर दीजिए, कल का हिसाब कल पर छोड़ दीजिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acha…















