
Akshay chaudhary
१. चेतना माने अंहकार-वस्तु या दृष्टा-दृश्य का जोड़ा। यह एक द्वैतवादी सबंध हे। शुद्ध चेतना जैसा कुछ नहीं होता। अहंकार का अपने विगलन होने का चुनाव चेतना के ऊंचे तल को दर्शाता है। २.न्यूरोसाइंस के अनुसार चेतना कोई आत्मा नहीं, बल्कि दिमाग की एक असर है। कोई अलग चीज़ नहीं जो दिमाग को चलाती है - दिमाग के चलने का तरीका ही चेतना है। 3 थ्योरी हैं, तीनों थोड़ा अलग जवाब देती हैं: 1. Global Workspace Theory - सबसे मान्य हमारे दिमाग में हर सेकंड लाखों प्रो…















