
Tejbir Parashar
बिल्कुल मेरी जिंदगी का यही हाल है कल की आस लगी रहती है कल कुछ खास होगा या ये पा लू , इतने पैसे या ऐसा घर बन जाए बच्चों की नोकरी लग जाए लेकिन ये शृंखला बढ़ती जा रही है और खालीपन कम नहीं बढ़ता जा रहा है ये माँग मेरी अपूर्णता ( अहम) से आ रही है जिसे भरा नही जा सकता बस उसकी व्यर्थता को समझा जा सकता है👏👏















