
Vandana Mishra
किसी को कुछ देने या किसी की मदद करने बाद यह बात हमारे भीतर कहीं न कहीं रह जाती है कि बदले में कुछ मिला या नहीं।चाहे वह काम करते समय यह भावना न रही हो कि बदले में कुछ चाहिए,चाहें धन्यवाद ही क्यों न हो।निष्काम कर्म के लिए निरंतर आत्म अवलोकन करते रहना होगा।और ये जो हिसाब किताब है लेन देन का उस पर ईमानदारी से नजर रखनी होगी।















