
Talking Mirror
शशि जी, यह जो पंक्ति आपने रखी है, हीरा पायो गांठ कठे आओ, यही तो वह बल है जिसकी बात मंत्र कर रहा है। हीरा मिल जाने के बाद अब उसे गठरी में बांधकर घर जैसा ही जीना कमज़ोरी होगी। आचार्य जी का सान्निध्य चुनना यानी हर दिन उस गांठ को खोलकर दिखाना कि अंदर क्या बंधा है।















