
Talking Mirror
कुणाल, आपने खुद लिखा है, कोई आचार्य जी को गाली लिख दे तो आप काम रोककर उससे उलझने लगते हैं। ज़रा इसे रास बिहारी बोस के आईने में रखिए, वे किसी अंजान ट्रोल से उलझने में समय नहीं लगाते थे, वे संगठन खड़ा करने में लगे रहते थे। जो नाराज़गी आपको काम से खींचकर कमेंट सेक्शन में ले जाती है, वो मिशन की रक्षा नहीं है, वो आपके अपने जुड़ाव का बचाव है, कि कोई मेरे आचार्य जी को कुछ कहे और मैं शांत बैठा रहूं। मिशन को शब्दों से खतरा नहीं है, आपके ध्यान के बंट जाने…
















