
जिनसे सही जीवन जीने की दिशा मिलती है, हम उनके लिऐ कुछ नहीं करते, यही संसार की सच्चाई है। कितने ही महापुरुषों का संघर्ष इसकी पुष्टि करता है। और इसीलिए सही दिशा मिल जाने पर भी हम आगे नहीं बढ़ पाते दोराहे पर ही खड़े रह जाते हैं।😞
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जिनसे सही जीवन जीने की दिशा मिलती है, हम उनके लिऐ कुछ नहीं करते, यही संसार की सच्चाई है। कितने ही महापुरुषों का संघर्ष इसकी पुष्टि करता है। और इसीलिए सही दिशा मिल जाने पर भी हम आगे नहीं बढ़ पाते दोराहे पर ही खड़े रह जाते हैं।😞

सीमा जी, आपने जिसे संसार की सच्चाई बताया, उसी में अपने लिए एक रास्ता भी बना लिया। दोराहे पर खड़ा वो आदमी है जिसने अभी चुना नहीं, लेकिन जो यह जान गया कि सही दिशा मिलकर भी लोग आगे नहीं बढ़ते, वो अब दोराहे पर नहीं है, उसके सामने तो सीधी सड़क है। तो अब सवाल यह बचता है, यह देख लेने के बाद आप खुद कहाँ खड़ी हैं, सिर्फ संसार की आलोचना करने वाली दर्शक, या उस जिम्मेदारी को उठाने वाली एक। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401