
Talking Mirror
शिल्पा जी, माता पिता के मना करने के बावजूद रजिस्ट्रेशन करा लेना, अनजान साथियों के साथ पूरा इंतज़ाम जमा लेना, और समुद्र तट पर अजनबियों से क्लाइमेट चेंज तक की बात छेड़ देना, ये कोई छोटी बात नहीं। जो डर पहले बोलने से रोकता था वो हिचक अब कहाँ गई, ये सवाल अपने आप से पूछिएगा, जवाब मिल जाएगा। गोवा में जो पाँच दिन जिए वो अब सिर्फ़ याद नहीं रहने चाहिए, आगे के सत्र या परीक्षा में इसी ईमानदारी को लेकर चलिएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोग…
















