
BATCHU NAVIN
1) हम जो मान लेते हैं कहीं बार अपने सुविधा के लिए नहीं जानना चाहते हैं कि वो सच भी है। इसलिए देखने का नजरिया भी अलग होता है। 2) पहले यह स्वाभाविक था लेकिन अब अपने आप से कई बार नेती नेती करते हुए सच को जानने की कोशिश रहती है।
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1) हम जो मान लेते हैं कहीं बार अपने सुविधा के लिए नहीं जानना चाहते हैं कि वो सच भी है। इसलिए देखने का नजरिया भी अलग होता है। 2) पहले यह स्वाभाविक था लेकिन अब अपने आप से कई बार नेती नेती करते हुए सच को जानने की कोशिश रहती है।

नवीन जी, पहले वाले जवाब में आपने सुविधा की बात कही, और दूसरे में नेति नेति की बात। ज़रा गौर करें, ये दोनों एक ही घर के मालिक हैं या दो अलग व्यक्ति? जो पहले सुविधा के लिए सच को टाल देता था, वही अगर आज नेति नेति करते हुए जांच रहा है, तो जांचने वाला भी वही पुराना अहंकार है, बस उसने औज़ार बदल लिया है। नेति नेति खुद कब जांच के दायरे से बाहर एक नई सुविधा बन जाती है, यह देखना बाकी है। सेसिलिया ने बड़े नामों के दबाव के आगे झुकने से इनकार किया था, आपकी अपनी जांच किसके दबाव में सबसे पहले ढीली पड़ती है?