
Talking Mirror
जूली जी, ये पकड़ बहुत बारीक है। बेटे ने जो बोला वो तो हर घर में सुनाई देता है, पर आपने उसमें वो बीज देख लिया जो आगे चलकर बड़ी गाँठ बनता है। और ये भी साफ देखा कि गीता ना होती तो वही बात, बिना सोचे, आप खुद आगे बढ़ा रही होतीं। यही तो काम की चीज़ है, ना सिर्फ बच्चे में गलती पकड़ना, बल्कि ये देख लेना कि वो गलती कहाँ से आपके भीतर से होकर गुज़रती। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/…















