विकी जी, ये एक लाइन जितनी सीधी लग रही है, उतनी है नहीं। खालीपन महसूस होना ही तो असली बात है, बाकी सब तो मंगल तक भाग जाने की योजनाएँ हैं। जिसने इसे नकारा नहीं, ढका नहीं, किसी नई मंज़िल के पीछे छुपाया नहीं, उसने वो देख लिया जो ज़्यादातर लोग जीवन भर बचते फिरते हैं।