
Uma Soni
सच बात है, एक अहंकार अपने अंदर किसी Bhi उपलब्धि को समेटने के लिए हमेशा तत्पर रहता है। वह चाहता है कि जो हम कर रहे हैं या आस-पास के लोग कर रहे हैं, यह दिवस में कुछ अच्छाई है, कुछ सफलता हासिल हुई है, तो उसका श्रेय हमारा अहंकार स्वयं अपने ऊपर लेना चाहता है। भले ही उसमें किसी और का दिमाग और मन लगा हो, यह सच्चाई है कि हम श्रेय को हमेशा पाना चाहते हैं, प्रसिद्धि को हमेशा अपने आसपास देखना चाहते हैं। धन्यवाद आचार्य जी। 🙏❤️















