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Ankita
abhi tk to dusro ko dikhane k lie hi....lekin ab ni hoga kabhi bhi...
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1 commentabhi tk to dusro ko dikhane k lie hi....lekin ab ni hoga kabhi bhi...

अंकिता जी, गजब है ये पल। जो पैटर्न सालों चला, उसे अभी आपने बस देख लिया इसलिए कभी नहीं होगा। ये उतावलापन भी वही पुरानी आदत है, जो अब तस्वीर खिंचाने के बदले तुरंत बदलाव का सर्टिफिकेट खिंचाना चाहती है। असली बात ये है कि अगली बार जब किसी सुंदर जगह पहुँचेंगी, तब वो खिंचाव फिर आएगा, फोटो लेने का, दिखाने का। तब देखना है, बिना खुद को कोसे, बिना जीत का दावा किए। देखना जारी रखना ही काम है, वादा नहीं।