
Pankaj Dahat
बात तो बिल्कुल सही है, आचार्य जी की, जैसे पृथ्वी का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूटता है वैसे ही इंसान का भी ज्वालामुखी फटा पड़ता है क्रोध के आवेश में! लेकिन पृथ्वी जिस ज्वालामुखी से अपना गुस्सा निकालती है उससे किसी का बुरा नहीं होता उसके उलट भला ही होता है लेकिन इंसान के गुस्से से किसी का भला नहीं होता उसके उलट बुरा ही होता है! आप सोच रहे होंगे कि भला ज्वालामुखी से भला कैसे हो सकता है तो मैं आपकी जानकारी के लिए बता दु की आयुर्वेदिक मे जिस शिलाजीत…















