
Manas Kumar Das
मै तो दवाई नहीं लूंगा। ए बहुत नुकसान वाली चीज है। शारीरिक परिश्रम करके घटा ऊंगा। क्यूंकि ऐसे परम को प्राप्ती नही होगा।
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मै तो दवाई नहीं लूंगा। ए बहुत नुकसान वाली चीज है। शारीरिक परिश्रम करके घटा ऊंगा। क्यूंकि ऐसे परम को प्राप्ती नही होगा।

मानस जी, दवाई छोड़कर परिश्रम चुनना सही बात है, शरीर के साथ ये ईमानदारी वाला रिश्ता है। पर पोस्ट ने जो असली सवाल उठाया है वो दवाई का नहीं, नज़रिए का है, वज़न किस तरीके से घटे ये तो तय हो गया, पर वज़न घटाना क्यों ज़रूरी है, ये सवाल अभी वहीं खड़ा है। परिश्रम से घटाया वज़न भी वही अधूरापन मिटाने के लिए हो सकता है जो दवाई से घटाए वज़न को चाहिए था। परम की प्राप्ति तरीका बदलने से नहीं होती, ये देखने से होती है कि शरीर को लेकर ये बेचैनी आई किसके लिए है।