
Sunita
क्या हम उस लालसा को पहचानने के लिए तैयार हैं, जो हमें लगातार अधिक पाने और दूसरों से बेहतर दिखने के लिए प्रेरित करती है? ────────── जो हम बने बैठे है उसके रहते उस लालसा को पहचानना सम्भव नहीं है लेकिन बोध की आँखों, वेदांत,आचार्य जी की शिक्षाओं से ये सम्भव है 🙏🙏















