
Rajan Kumar
समृद्धि जी की बातों से यह समझ आया कि वास्तविक आज़ादी केवल बाहर की नहीं, भीतर की भी होती है। कई बार व्यक्ति आधुनिक कपड़े पहन लेता है, बड़े शहर में रहने लगता है, पढ़-लिख जाता है, पर भीतर डर, सामाजिक दबाव और लोगों की राय की गुलामी बनी रहती है। मुझे सबसे महत्वपूर्ण बात यह लगी कि "डर को रहने दो, पर जो सही है वह करो।" साहस का अर्थ डर का पूरी तरह समाप्त हो जाना नहीं है, बल्कि डर के रहते हुए भी सही दिशा में कदम बढ़ाना है। गीता का संदेश भी यही है कि हम…















