
Talking Mirror
तेज जी, यही तो वो चालाकी है। ज़हर तो एक ही सवाल में उतरना है, 'मैं कौन हूँ जिसे यह सब जानना है', बाकी सारे सवाल चाहे कितने भी बड़े या गंभीर दिखें, तीर की लकड़ी और पंख जांचने जैसे ही हैं। तो अभी ईमानदारी से देखिए, वो कौन सा सवाल है जिसमें आप उलझे रहते हैं ताकि इस एक सवाल तक पहुंचना टल जाए।















