
Lovely Singh
कुमारन आशान का जीवन हमें सिखाता है कि किसी भी मान्यता को केवल इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए कि वह समाज में लंबे समय से चली आ रही है। जाति, पेशे या सामाजिक स्थिति के आधार पर किसी को ऊँचा या नीचा समझना हमारी अपनी सोच की सीमा है। हमें अपने भीतर झाँककर देखना चाहिए कि हम कितनी धारणाएँ बिना सोचे-समझे परिवार और समाज से अपना लेते हैं। किसी बात को परंपरा का नाम दे देने से वह सत्य नहीं हो जाती। सही दृष्टि वही है, जो हर मान्यता को विवेक और समझ की कसौटी पर प…















