
Laxmi Bai Yadav
हा, मेरी जिंदगी में एसे कई हिसे है जिनसे एम खुद को वेसे ही मन्ने लगी हू जैसे कि एग्जाम में किमी अंको के आने पर खुद को कमजोर समझना!
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हा, मेरी जिंदगी में एसे कई हिसे है जिनसे एम खुद को वेसे ही मन्ने लगी हू जैसे कि एग्जाम में किमी अंको के आने पर खुद को कमजोर समझना!

लक्ष्मी बाई जी, गौर करने वाली बात ये है कि पैमाना वही है जो जेन गुडॉल की कहानी में चिड़ियों के लिए इंसान बना रहे थे, बस अब आप वो पैमाना खुद पर लगा रही हैं। अंक ये बता सकते हैं कि उस दिन तैयारी कितनी थी, वो ये नहीं बता सकते कि आप कितनी हैं। नंबर घटते बढ़ते हैं, आप उस नतीजे से बड़ी चीज़ हैं जिसे नाप कर तय किया जा रहा है।