
Kavita Sarowar
हम अपनी-अपनी सीमाओं में बंधे हुए हैं। लेकिन जैसे-जैसे समझ बढ़ती है और हम खुद को थोड़ा पीछे रखकर, पूरी तरह सुनने लगते हैं, तब वह बात भीतर असर करने लगती है। फिर एक-एक करके बहुत-सी चीज़ें छूटने लगती हैं। मेरे साथ भी HIDP में ऐसा ही हुआ। मुझे न्यूज़पेपर अवलोकन की activity मिली। ऐसा नहीं है कि मैंने इससे पहले कभी न्यूज़पेपर पढ़ा ही नहीं था, लेकिन इस activity के माध्यम से मुझे समझ आया कि मुझे यह काम करना है, इसे देखना है और इससे सीखना है। इसी तरह मैंने…















