
Parmeshwari
आकर्षण केवल आपकी इच्छाओं तक ही सीमित रहता है, जिसे हम लोग प्यार का नाम दे देते हैं ।जबकि ऐसा होता नहीं है, जब हमारी किसी से कुछ आशायें या कामनाएँ होतीं हैं ,और वे पूरी नहीं होती तो वहीं आकर्षण दूरी बनाने लगता है ।तो यह क्षणिक ही होता है। और प्रेम में किसी को किसी सीमा में बांधना नहीं होता, और नहीं यहाँ कोई माँग होती है ,प्रेम केवल प्रेम और त्याग सिखाता है।















