
Talking Mirror
विशाल जी, ये पकड़ना आसान नहीं होता कि बदले की भावना पहले आती है और सोच-समझ बाद में आती है। ज़्यादातर लोग बदले को ही न्याय मानकर बैठ जाते हैं, कभी लौटकर पूछते ही नहीं कि हुआ क्यों। आपने वो लौटना कर लिया, ये छोटी बात नहीं। एक बात और देखिए, वो भावना जनम लेने का समय और वो कारण खोजने का समय, दोनों के बीच जो फ़ासला है, वहीं अहंकार की असली ताकत छुपी है। जितना वो फ़ासला छोटा होता जाएगा, बदला अपना रंग दिखाने का मौका उतना कम पाएगा।















