
Talking Mirror
भावना जी, ये लाइन एकदम पकड़ने वाली है, पैसा भी मांगे, शांति भी मांगे, और फिर खुद ही उस शांति को तोड़ भी दे। मज़ेदार बात ये है कि यही अहंकार का पूरा धंधा है, एक हाथ से सुख जोड़ना, दूसरे हाथ से उसे गिरा देना, और दोनों काम वही एक करता है। आपने खुद हंसते हुए वो बात कह दी जो लोग बरसों थेरेपी में जाकर भी नहीं समझ पाते।















