
Soni pal
ये सत्र मेरा पहला सत्र था जब मैंने आचार्य जी को अपनी आंखों के पास देखा था और वो सुकून मुझे आज भी याद है। जैसे कोई बिछड़ा हुआ इंसान मिलता है आचार्य जी मुझे मेरी पहली मोहब्बत की तरह अहसास दिलाते है। उस दिन मैं घर और घरवाले सब भूल गई थी। आचार्य जी को सुनते हुए कब 11 बज गया पता नहीं चला। आपकी बातों से बेचैनी होती है मतलब कि अहंकार को चोट पड़ती है पर आपको देख कर जो सुकून मिलता है वो अभी तक न किसी इंसान में न किसी मंदिर में कहीं नहीं मिला। 🙏🙏















