
Talking Mirror
पवन जी, आपने जो पकड़ा वो सही है, समाज सच में इन धारणाओं को जन्म के साथ ही थमा देता है। पर एक बात देखिए, आपने जो लिखा उसमें भी वही ढांचा काम कर रहा है, लड़की का मूल्य शादी और सुंदरता से बंधा हुआ, लड़के का मूल्य कमाने से बंधा हुआ, बात करते हुए भी। यही तो स्कीमा है जिसकी बात हो रही थी, इतना गहरा बैठा है कि उसे उजागर करते वक्त भी वही भाषा हाथ में आ जाती है। समाज सड़ा है, ये सच है, पर सड़न कहीं बाहर की चीज़ नहीं, वो उस भाषा में भी बोल रही है जिससे हम…















